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उत्तराखंड के ग्लेशियरों पर मंडराया बड़ा खतरा, तेजी से पिघल रही बर्फ और नई झील बढ़ा रही हैं बाढ़ की आशंका
Public Lokpal
September 03, 2026
उत्तराखंड के ग्लेशियरों पर मंडराया बड़ा खतरा, तेजी से पिघल रही बर्फ और नई झील बढ़ा रही हैं बाढ़ की आशंका
उत्तराखंड के टिहरी जिले की भिलंगना घाटी में जलवायु परिवर्तन का गंभीर असर देखने को मिल रहा है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान (Wadia Institute of Himalayan Geology) के वैज्ञानिकों द्वारा अगस्त 2026 में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, इस क्षेत्र के खतलिंग, फाटिंग, दूधगंगा, रतनांगरिया, जोगिन और एक अन्य ग्लेशियर में बर्फ पिघलने की गति अत्यधिक तेज हो गई है।
अध्ययन में पाया गया है कि घाटी का सबसे बड़ा खतलिंग ग्लेशियर 1973 से 2024 के बीच करीब 5.33 किलोमीटर पीछे खिसक चुका है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि 2014 से 2025 के दौरान इन ग्लेशियरों के पिघलने और बर्फ के क्षय की दर 1973 से 2000 के शुरुआती दशकों की तुलना में चार से पांच गुना तक बढ़ गई है।
इस तीव्र गति से हो रहे ग्लेशियर क्षरण के कारण एक नए खतरे ने जन्म लिया है। एक अज्ञात ग्लेशियर के सामने 0.36 वर्ग किलोमीटर के आकार की एक नई झील बन गई है, जिसके अचानक फटने यानी 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' (GLOF) का भारी जोखिम पैदा हो गया है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के अनुसार, पूरे उत्तराखंड में इस समय 426 हिमनद झीलें मौजूद हैं, जो नीचे बसे निचले इलाकों और टिहरी बांध परियोजना के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।
वैज्ञानिक इस आपदा से निपटने के लिए उन्नत उपग्रह निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणाली को जल्द लागू करने पर जोर दे रहे हैं।






