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क्यों खास है बागपत? देश के इस सबसे छोटे जिले ने कैसे रचे 7 अर्जुन पुरस्कारों के इतिहास
Public Lokpal
August 28, 2026
क्यों खास है बागपत? देश के इस सबसे छोटे जिले ने कैसे रचे 7 अर्जुन पुरस्कारों के इतिहास
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा जिला बागपत, पिछले चार दशकों में सात अर्जुन पुरस्कार विजेता देकर खेल जगत में एक मिसाल बन चुका है। इस अद्वितीय सफलता के पीछे ग्रामीण संस्कृति, पारिवारिक त्याग और सरकारी नौकरियों की मजबूत चाहत का गहरा तालमेल है।
इसकी नींव गहरी जड़ें जमा चुकी अखाड़ा संस्कृति पर टिकी है। मलकपुर जैसे गांवों में कुश्ती जीवनशैली का हिस्सा है, जहां पीढ़ियों से बच्चे अखाड़ों में मेहनत करते आ रहे हैं। ग्रामीण परिवार अपनी सीमित आय के बावजूद बच्चों के पौष्टिक खान-पान और ट्रेनिंग का खर्च उठाते हैं।
साथ ही, खेल इस क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक तरक्की का सबसे बड़ा जरिया हैं।
खेल में उपलब्धि सेना, पुलिस या अन्य सरकारी विभागों में स्थिर करियर की गारंटी बनती है।
सुभाष वर्मा से शुरू हुआ यह सफर राजीव तोमर और सुनील कुमार राणा जैसे दिग्गजों से होता हुआ शूटिंग (अखिल श्योराण) और पैरा-स्पोर्ट्स (अंकुर धामा) तक फैला, जिसने इस ग्रामीण जिले को चैंपियन फैक्ट्री बना दिया।





