BIG NEWS
- उद्यमी मानव सरदाना ने डीएलएफ 'द डाहलियास' में 271 करोड़ रुपये में खरीदा पेंटहाउस
- एयर इंडिया की उड़ान में हाइड्रोलिक फेलियर के कारण 300 फीट की गिरावट
- गृह मंत्रालय का बड़ा कदम: अब 88 अंतरराष्ट्रीय पोर्ट्स पर मिलेगी ई-वीज़ा की सुविधा
- राम मंदिर ट्रस्ट को जल्द मिलेगा पहला सीईओ, 18 उम्मीदवार अंतिम दौर में
- लोकसभा ने बिना चर्चा के पारित किया 'अधिकरण सुधार विधेयक, 2026'
- संसद गतिरोध: छात्र विरोध प्रदर्शनों पर बहस के लिए सरकार तैयार, गृह मंत्री देंगे जवाब
- एआर रहमान के बेटे अमीन चेन्नई में कार हादसे का शिकार, सुरक्षित बचे
- झारखंड हलचल: विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस और छात्रों में हिंसक झड़प, जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल. खियांते गिरफ्तार
- छत्तीसगढ़: रिश्तेदार को जमानत दिलाने के लिए मुख्य न्यायाधीश की तस्वीर के साथ तांत्रिक अनुष्ठान करने वाला गिरफ्तार
- अमेरिका में एच-1B वीजा का 60 दिन का नियम हो सकता है खत्म
लोकसभा में बिल पास: क्या UPI ट्रांजेक्शन अब हो जाएंगे चार्जड? जानिए पूरी बात
Public Lokpal
August 06, 2026
लोकसभा में बिल पास: क्या UPI ट्रांजेक्शन अब हो जाएंगे चार्जड? जानिए पूरी बात
लोकसभा ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पास कर दिया है। इस बिल के जरिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन किया गया है, जिससे सरकार को बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को डिजिटल ट्रांजेक्शन पर चार्ज (जैसे मर्चेंट डिस्काउंट रेट या MDR) वसूलने की अनुमति देने का कानूनी अधिकार मिल गया है।
अभी कोई चार्ज नहीं लगा है: इस बिल के पास होने का मतलब यह कतई नहीं है कि UPI ट्रांजेक्शन तुरंत महंगे हो गए हैं या आम जनता पर कोई चार्ज लगना शुरू हो गया है।
भविष्य के लिए रास्ता साफ: यह संशोधन केवल एक कानूनी ढांचा (Enabling Framework) तैयार करता है। इसके तहत भविष्य में केंद्र सरकार नोटिफिकेशन जारी करके तय कर सकती है कि किन चुनिंदा ट्रांजेक्शन या बड़े व्यापारियों पर चार्ज लगाया जाए।
क्यों पड़ी जरूरत: बैंकों और वित्तीय संस्थाओं का तर्क था कि पूरी तरह से जीरो-चार्ज (Zero-MDR) मॉडल होने के कारण डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी खर्चों को संभालना मुश्किल हो रहा था।
आम लोगों पर असर: माना जा रहा है कि छोटे दुकानदारों और सामान्य पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांजेक्शन को सुरक्षित रखने के लिए सरकार भविष्य में केवल बड़े मर्चेंट्स या हाई-वेरिएंट ट्रांजेक्शन पर ही शुल्क का दायरा तय कर सकती है।










