BIG NEWS
- आरबीआई का टाटा संस को झटका: निजी बने रहने की याचिका खारिज, शेयर बाजार में लिस्टिंग का निर्देश
- अमीषा पटेल की घरेलू सहायिका मुंबई में 5 लाख रुपये के डायमंड कंगन चोरी के आरोप में गिरफ्तार
- BRICS शिखर सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली पहुंचे, पीएम मोदी के साथ होगी द्विपक्षीय बैठक
- गुजरात में बीमारी से 62 एशियाई शेरों की मौत, शावक सबसे ज्यादा प्रभावित
- पूर्व सीएम हरीश रावत ने कांग्रेस पदों से दिया इस्तीफा, पूर्व पीए के घर से नकदी और सोना बरामद
- ब्रिक्स सम्मेलन: रविवार को सुबह 6 बजे से दौड़ेगी दिल्ली मेट्रो
- वीरेंद्र सहवाग ओटीटी पर करेंगे धमाकेदार एंट्री, 'राइज एंड फॉल सीजन 2' के बने होस्ट
- आईआरसीटीसी ने तोड़े रिकॉर्ड: त्योहारी भीड़ के बीच एक दिन में किए 20 लाख ट्रेन टिकट बुक
- दिल्ली के चांदनी चौक में बेसमेंट के अवैध इस्तेमाल पर 54 ज्वैलरी दुकानें सील
- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने दिल्ली पहुँचे पुतिन, भारत-रूस द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने दिल्ली पहुँचे पुतिन, भारत-रूस द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर
Public Lokpal
September 11, 2026
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने दिल्ली पहुँचे पुतिन, भारत-रूस द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तीन दिवसीय दौरे पर नई दिल्ली पहुँच चुके हैं, जहाँ वे भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। यूक्रेन संघर्ष के बाद रूस से बाहर किसी ब्रिक्स सम्मेलन में उनकी यह पहली प्रत्यक्ष उपस्थिति है।
अपनी इस यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस महत्वपूर्ण चर्चा का मुख्य उद्देश्य रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करना, ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना, और द्विपक्षीय व्यापार तथा प्रौद्योगिकी साझेदारी को नए आयाम देना है। इसके अलावा, आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।
वार्ता के उपरांत, दोनों नेता भारत-रूस औद्योगिक एवं तकनीकी सहयोग को प्रदर्शित करने वाली 'इनोप्रॉम' प्रदर्शनी का भी अवलोकन करेंगे।
इस शिखर सम्मेलन के मुख्य सत्रों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने और वैश्विक शासन सुधारों जैसे प्रमुख विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।









