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डिजिटल बदनामी से मुक्ति: 'भूल जाने का अधिकार'

Public Lokpal
July 18, 2026

डिजिटल बदनामी से मुक्ति: 'भूल जाने का अधिकार'


'भूल जाने का अधिकार' (Right to be Forgotten) आज के दौर की एक बड़ी समस्या को दूर करता है: अदालत भले ही आपको बरी कर दे, लेकिन गूगल आपकी अतीत की गलतियों या आरोपों को हमेशा जिंदा रखता है। भारत में इसके लिए कोई अलग से कानून नहीं है, बल्कि यह अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत 'निजता के मौलिक अधिकार' (Right to Privacy) से जुड़ा हुआ है।

अदालतें मानती हैं कि अगर कोई व्यक्ति बरी हो चुका है या उसका कोई निजी पारिवारिक विवाद सुलझ चुका है, तो उसकी जानकारी इंटरनेट पर रखने का कोई सार्वजनिक हित नहीं है। इतिहास को पूरी तरह मिटाए बिना, कोर्ट दो तरीके अपनाता है: मास्किंग (ऑनलाइन फैसलों से नाम हटाकर गुप्त रखना) और डी-इंडेक्सिंग (गूगल को निर्देश देना कि नाम सर्च करने पर वह केस न दिखे)।

हालांकि, यह अधिकार असीमित नहीं है। गंभीर अपराधियों या सार्वजनिक हस्तियों (Public Figures) को यह राहत नहीं मिलती है।

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