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राजेश एक्सपोर्ट्स में 'बड़ी' गड़बड़ियों और विदेशी ट्रांज़ैक्शन के रिकॉर्ड नहीं, ईडी का बड़ा आरोप!
Public Lokpal
June 24, 2026
राजेश एक्सपोर्ट्स में 'बड़ी' गड़बड़ियों और विदेशी ट्रांज़ैक्शन के रिकॉर्ड नहीं, ईडी का बड़ा आरोप!
नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को आरोप लगाया कि गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी बनाने वाली कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स के मुख्य बिजनेस इंडिकेटर सामान्य कमर्शियल प्रैक्टिस से "काफी" अलग थे। इसके अलावा, विदेशी ट्रांज़ैक्शन से जुड़े रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं थे।
फेडरल एजेंसी ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के कथित उल्लंघन के मामले में 23 जून को बेंगलुरु स्थित कंपनी और उससे जुड़े लोगों के यहां तलाशी लेने के बाद यह बयान जारी किया।
ED ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) के खिलाफ कम से कम पांच मुद्दों की पहचान की और तलाशी के दौरान कई "अपराध साबित करने वाले" दस्तावेज़ और डिजिटल डिवाइस बरामद किए।
कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन राजेश मेहता ने PTI के साथ हाल ही में हुए एक इंटरव्यू में फंड डायवर्जन या किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया। उन्होंने कहा था कि कंपनी SEBI के आदेश पर होने वाले नए फॉरेंसिक ऑडिट में पूरा सहयोग करेगी और उसके खिलाफ मार्केट रेगुलेटर के अंतरिम आदेश को चुनौती नहीं देगी।
ED के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स अपने विदेशी ट्रांज़ैक्शन - जिसमें इंपोर्ट, एक्सपोर्ट, विदेशी निवेश और विदेशी व्यापार से जुड़ी देनदारियों और प्राप्तियों का निपटान शामिल है - से जुड़े दस्तावेज़ पेश करने में "विफल" रही। इससे ऐसे ट्रांज़ैक्शन की असलियत की पुष्टि करना लगभग असंभव हो गया।
एजेंसी ने कहा, "उदाहरण के लिए, अफ्रीकी खदानों में 1,035 करोड़ रुपये के कथित निवेश के समकालीन रिकॉर्ड और दस्तावेज़ न तो मिले और न ही कंपनी ने अभी तक उपलब्ध कराए हैं।"
एजेंसी ने दावा किया कि कंपनी के "मुख्य बिजनेस इंडिकेटर" सामान्य कमर्शियल प्रैक्टिस से "काफी" अलग थे।
उदाहरण के लिए, एजेंसी ने कहा कि सीनियर मैनेजमेंट को दिया जाने वाला वेतन कंपनी के कामकाज के पैमाने की तुलना में "असामान्य रूप से कम" था।
एजेंसी ने पाया कि चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) को 2020 से कोई वेतन नहीं मिला है, जबकि मैनेजिंग डायरेक्टर को प्रति माह केवल 17,000 रुपये का भुगतान किया गया, जबकि कंपनी ने लगभग 7.7 लाख करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू रिपोर्ट किया था।
एजेंसी ने कहा कि जांच में REL के शेयरों में कुछ व्यक्तियों द्वारा किए गए "संदिग्ध" ब्लॉक ट्रेड का पता चला है। इन व्यक्तियों के नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) द्वारा जारी लीक में भी सामने आए हैं, जो संभावित रूप से बिना बताए गए उन ऑफशोर लिंक की ओर इशारा करते हैं, जिनकी जांच की जा रही है। ED ने आरोप लगाया कि NRI बेनामीदारों का इस्तेमाल करके शेयरों में हेरफेर के ज़रिए भारत से 600 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम निकाली गई।
बेनामीदार वह व्यक्ति या संस्था होती है जिसके नाम पर बेनामी संपत्ति ट्रांसफर की जाती है।
ED ने बयान में यह भी कहा कि कंपनी UAE और दूसरे विदेशी इलाकों में मौजूद संदिग्ध विदेशी पार्टियों से ट्रेड पेबल्स (व्यापारिक देनदारियां) और ट्रेड रिसीवेबल्स (व्यापारिक प्राप्तियां) को एडजस्ट करने के काम में शामिल पाई गई।
उसने आगे कहा कि तलाशी के दौरान स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक जांच) से पता चला कि फैक्ट्री के रजिस्टरों में दर्ज स्टॉक और मौके पर मिले असली सामान के बीच लगभग 40 प्रतिशत का "अंतर" था।
केंद्रीय एजेंसी की यह कार्रवाई राजेश एक्सपोर्ट्स में बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी के SEBI के आरोपों के बाद हुई है।
मार्केट रेगुलेटर ने हाल ही में आरोप लगाया था कि कंपनी ने 2020-21 से 2024-25 के फाइनेंशियल ईयर के लिए 15.15 लाख करोड़ रुपये तक का संदिग्ध कंसोलिडेटेड रेवेन्यू इन्फ्लेशन (राजस्व में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई रकम) दिखाया था।





