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नेशनल फार्मेसी काउंसिल बिल के ड्राफ्ट पर सरकार ने मांगे सुझाव
Public Lokpal
July 05, 2026
नेशनल फार्मेसी काउंसिल बिल के ड्राफ्ट पर सरकार ने मांगे सुझाव
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में फार्मेसी शिक्षा और मेडिकल स्टोर्स के रेगुलेशन को आधुनिक बनाने के लिए 'नेशनल फार्मेसी काउंसिल बिल' का नया ड्राफ्ट जारी किया है। यह नया कानून दशकों पुराने 'फार्मेसी एक्ट, 1948' की जगह लेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस नए ड्राफ्ट पर आम जनता, डॉक्टरों और फार्मा एक्सपर्ट्स से आगामी 31 जुलाई तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
इस बिल का मुख्य उद्देश्य फार्मेसी सेक्टर में पारदर्शिता लाना, नकली दवाओं की बिक्री पर रोक लगाना और फार्मासिस्टों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सेंट्रलाइज्ड करना है।
बिल के मुख्य उद्देश्य और बड़े बदलाव
डिजिटलाइजेशन और सेंट्रलाइजेशन: फार्मासिस्टों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और केंद्रीय (Centralized) बनाया जाएगा। इससे फर्जी डिग्री और फर्जी रजिस्ट्रेशन पर लगाम लगेगी।
पारदर्शिता (Transparency): पूरे फार्मेसी सेक्टर में पारदर्शिता आने से मेडिकल स्टोर्स के संचालन में सुधार होगा।
नकली दवाओं पर वार: सख्त नियमों और बेहतर ट्रैकिंग के जरिए मार्केट में नकली दवाओं (Spurious Drugs) की बिक्री को रोकने में मदद मिलेगी।
नए कानून की जरूरत क्यों थी?
78 साल पुराना एक्ट: वर्तमान 'फार्मेसी एक्ट, 1948' आजादी के तुरंत बाद का है। इसमें आज की ई-फार्मेसी, ऑनलाइन दवाओं की डिलीवरी और आधुनिक फार्मास्युटिकल रिसर्च जैसे पहलुओं के लिए कोई मजबूत कानूनी ढांचा नहीं था।
क्वालिटी कंट्रोल: देश भर में फार्मेसी कॉलेजों (Pharmacy Colleges) की बाढ़ सी आ गई है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता गिरी है। नया काउंसिल बिल शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए कड़े नियम ला सकता है।
सुझाव कैसे और क्यों दें?
स्वास्थ्य मंत्रालय ने 31 जुलाई तक का समय दिया है। यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है जहाँ आम जनता, मेडिकल स्टोर्स चलाने वाले, डॉक्टर्स और फार्मा एक्सपर्ट्स अपनी बात रख सकते हैं।









