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संसद ने पास किया कठोर एंटी-पेपर लीक कानून: 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना
Public Lokpal
July 31, 2026
संसद ने पास किया कठोर एंटी-पेपर लीक कानून: 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना
संसद ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित धोखाधड़ी को रोकने के लिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस नए और सख्त कानून के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. व्यक्तियों के लिए कड़े दंड और जुर्माना
कैद: अनुचित साधनों का उपयोग करने या प्रश्नपत्र लीक करने वाले व्यक्तियों के लिए न्यूनतम सजा को 3 साल से बढ़ाकर 5 से 10 साल कर दिया गया है।
जुर्माना: अधिकतम मौद्रिक जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है।
2. संगठित अपराध सिंडिकेट्स पर कड़ी कार्रवाई
परीक्षा में धोखाधड़ी करने वाले संगठित गिरोहों या सिंडिकेट्स के लिए न्यूनतम सजा अब 7 साल (जिसे आगे बढ़ाया जा सकता है) है।
संगठित अपराध के लिए न्यूनतम जुर्माना भारी मात्रा में बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
3. सर्विस प्रोवाइडर्स पर सख्त कार्रवाई
परीक्षा आयोजित करने में शामिल सेवा प्रदाताओं (Service Providers) या लॉजिस्टिक्स एजेंसियों पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
दोषी सर्विस प्रोवाइडर्स को प्रतिबंधित (Debar) करने की अवधि 4 साल से बढ़ाकर 8 साल कर दी गई है।
ऐसी कंपनियों के निदेशकों और वरिष्ठ प्रबंधन को 5 से 10 साल तक की जेल हो सकती है।
4. फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त समय सीमा
विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट: इस अधिनियम के तहत मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाएगा।
जांच की समयसीमा: जांच एजेंसियों को 2 महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी।
दैनिक सुनवाई: अदालतों में मामलों की सुनवाई रोजाना होगी और आरोपपत्र दाखिल होने के 3 महीने के भीतर पूरी की जाएगी।
दायरे में आने वाली परीक्षाएं
यह कानून UPSC, SSC, RRB, IBPS और NTA (जैसे NEET, JEE और सिविल सेवा परीक्षा) द्वारा आयोजित सभी प्रमुख केंद्रीय भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं पर लागू होता है। इसके तहत सभी अपराध संज्ञेय (Cognizable), गैर-जमानती (Non-bailable) और गैर-समझौता योग्य (Non-compoundable) हैं।


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