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तरुण तेजपाल ने रेप केस में सज़ा के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाज़ा
Public Lokpal
August 20, 2026
तरुण तेजपाल ने रेप केस में सज़ा के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाज़ा
नई दिल्ली: 'तहलका' मैगज़ीन के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल ने एक जूनियर सहयोगी के साथ रेप के मामले में अपनी सज़ा (10 साल की जेल) के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है।
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने 6 अगस्त को तेजपाल को एक पूर्व सहयोगी के साथ रेप का दोषी ठहराया और 10 साल की जेल की सज़ा सुनाई। इससे पहले 2021 में उन्हें इस पुराने मामले में बरी कर दिया गया था, लेकिन हाई कोर्ट ने उस फ़ैसले को पलट दिया। तेजपाल ने हाई कोर्ट के इस आदेश को चुनौती दी है।
गोवा सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपील करके इस मामले में तेजपाल की सज़ा बढ़ाने की मांग की है।
राज्य सरकार ने 10 साल की सख़्त कैद की सज़ा को बढ़ाने की मांग की है। सरकार का कहना है कि यह सज़ा काफ़ी नहीं है और उसने पूर्व एडिटर के लिए उम्रकैद की मांग की है।
हाई कोर्ट ने यह फ़ैसला गोवा सरकार की उस अपील पर सुनाया था जिसमें 2021 में गोवा सेशंस कोर्ट द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने को चुनौती दी गई थी।
यह मामला एक महिला पत्रकार के आरोपों से जुड़ा है। महिला ने आरोप लगाया था कि 2013 में पणजी में एक ऑफ़िशियल इवेंट के दौरान, 7 और 8 नवंबर को तेजपाल ने होटल की लिफ़्ट में उनके साथ यौन उत्पीड़न किया था। इन आरोपों के चलते तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ़्तार किया गया था।
29 सितंबर 2017 को उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत आरोप तय किए गए, जिनमें रेप, यौन उत्पीड़न और ग़लत तरीके से बंधक बनाना शामिल था। हालांकि, उन्होंने खुद को बेगुनाह बताया।
मई 2021 में, गोवा सेशंस कोर्ट ने तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष मामले को बिना किसी शक के साबित करने में नाकाम रहा।
ट्रायल कोर्ट ने मेडिकल सबूतों की कमी का ज़िक्र किया और शिकायतकर्ता व तेजपाल के बीच हुए मैसेज पर भरोसा किया। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि ये मैसेज इस दावे का समर्थन नहीं करते कि कथित हमले से महिला को गहरा सदमा (ट्रॉमा) पहुंचा था।
इसके बाद गोवा सरकार ने ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को रद्द करने की मांग करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में बरी किए जाने के फ़ैसले को चुनौती दी।





