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ऐसा होगा MGNREGA के नए संस्करण VB-GRAMG का नया प्रारूप
Public Lokpal
June 30, 2026
ऐसा होगा MGNREGA के नए संस्करण VB-GRAMG का नया प्रारूप
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार योजना VB-GRAMG के लिए नया फ्रेमवर्क जारी किया है। यह UPA के समय की MGNREGA योजना के 'मांग-आधारित' (demand-driven) तरीके से हटकर, टेक्नोलॉजी पर आधारित 'डेटा-संचालित' प्लानिंग सिस्टम की ओर एक बड़ा बदलाव है।
1 जुलाई से लागू होने वाले इस नए फ्रेमवर्क का मकसद पंचायतों में ग्रामीण रोजगार की पहचान, प्राथमिकता तय करने और उन्हें लागू करने के तरीके को बदलना है।
इस नए फ्रेमवर्क के केंद्र में 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' (VGPP) है। डॉक्यूमेंट के अनुसार, यह पारंपरिक ग्राम-स्तरीय "विश लिस्ट" (इच्छाओं की सूची) वाली प्लानिंग की जगह टेक्नोलॉजी-आधारित, जियोस्पेशियल तकनीक से लैस और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल वाले ग्रामीण विकास मॉडल को अपनाएगा।
जहां MGNREGA में 100 दिनों के वेतन-रोजगार का प्रावधान है, वहीं VB-GRAMG में इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। MGNREGA के मांग-आधारित डिज़ाइन से अलग, VB-GRAMG में राज्यों के लिए एक तय आवंटन (normative allocation) का प्रावधान है; तय आवंटन से ज़्यादा होने वाला कोई भी खर्च संबंधित राज्य सरकारों को उठाना होगा। केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना होने के बावजूद, VB-GRAMG के तहत राज्य सरकारों को पहले की तुलना में खर्च का बड़ा हिस्सा उठाना होगा।
नए फ्रेमवर्क के तहत, ग्राम पंचायतें अब मौजूदा सार्वजनिक संपत्तियों की मैपिंग करने, बुनियादी ढांचे की कमियों की पहचान करने और रियल-टाइम जियोस्पेशियल डेटा के आधार पर विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार करने के लिए 'युक्तधारा' (Yuktdhara), 'पीएम गति शक्ति' (PM Gati Shakti), 'भुवन' (Bhuvan) और 'इंडिया-WRIS' (India-WRIS) जैसे इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगी।
यह फ्रेमवर्क ग्रामीण विकास के लिए पांच मुख्य क्षेत्रों की पहचान करता है: जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका, आपदा न्यूनीकरण और जलवायु लचीलापन।
इनमें जल सुरक्षा को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दी गई है, जिसमें केंद्र ने खर्च के नियमों को सीधे भूजल के दबाव के स्तर से जोड़ा है।
फ्रेमवर्क का प्रस्ताव है कि खर्च का कम से कम 65% हिस्सा अत्यधिक दोहन वाले और गंभीर भूजल ब्लॉक (critical groundwater blocks) पर, लगभग 40% हिस्सा अर्ध-गंभीर (semi-critical) क्षेत्रों में और 30% हिस्सा सुरक्षित भूजल क्षेत्रों में किया जाए। पंचायतें भुवन (Bhuvan), इंडिया-WRIS (India-WRIS) और पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) जैसे प्लेटफॉर्म से जियोस्पेशियल डेटा का इस्तेमाल करके पानी के संसाधनों का डिटेल्ड असेसमेंट करेंगी। साथ ही, वे पानी की उपलब्धता, रिचार्ज की क्षमता, स्टोरेज क्षमता और वितरण की दक्षता का पता लगाने के लिए गांव-स्तर पर पानी की बजटिंग भी करेंगी।
इस फ्रेमवर्क में 107 मंजूर कामों को भी शामिल किया गया है, जिनमें से 32 काम मरम्मत और रखरखाव पर केंद्रित हैं। इनमें ग्राउंडवाटर रिचार्ज को बेहतर बनाने, सिंचाई की दक्षता बढ़ाने, पारंपरिक जल स्रोतों को बहाल करने और स्थानीय स्टोरेज सिस्टम को बढ़ावा देने के उपाय शामिल हैं।
नए फ्रेमवर्क की एक और खास बात सामाजिक समावेश पर इसका फोकस है।
संपत्ति बनाने और आजीविका में मदद देने में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, महिलाओं के नेतृत्व वाले परिवारों, दिव्यांगों और अन्य वंचित समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी।




