BIG NEWS
- पीलीभीत में 10,470 फर्जी मतदाता प्रविष्टियां उजागर; तीन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
- कैबिनेट सचिवालय ने चुनाव आयुक्तों की शिकायतों पर कार्रवाई से किया इनकार
- मुंबई की धुंध के आगे फीकी पड़ी दिल्ली, हाई कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा- चैन की नींद कैसे आ रही है?
- 'वोट चोरी' के खिलाफ INDIA गठबंधन की ऑनलाइन बैठक, 1 नवंबर की रैली की रणनीति तय
- तिरंगे और प्रोटेस्ट फोटो पर विवाद: प्रियंका गांधी के बेटे की कलाकृतियां शो से पहले हटाई गईं
- टाइगर श्रॉफ कार फायरिंग केस में दिल्ली पुलिस ने दो महिलाओं समेत चार को किया गिरफ्तार
- डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रद्द किए 3 लाख से अधिक अमेरिकी वीजा, सख्त आव्रजन कार्रवाई जारी
- परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड: सीबीआई ने संभाली जांच, पंजाब के मानसा पहुंची विशेष टीम
- मुंबई के कुर्ला में 13 मंजिला इमारत में लगी आग, तीन बच्चों समेत नौ घायल
- मोहन भागवत का बड़ा बयान, कहा- भारत को अस्थिर करने में जुटी हैं 'असुरी ताकतें'
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में AAP नेताओं और छात्रों सहित 500 से अधिक लोग हिरासत में
Public Lokpal
October 02, 2026
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में AAP नेताओं और छात्रों सहित 500 से अधिक लोग हिरासत में
नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी में उस समय तनाव फैल गया जब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर एक उच्च-प्रोफाइल विरोध प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख नेताओं आतिशी और सौरभ भारद्वाज तथा छात्र कार्यकर्ताओं सहित 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
प्रदर्शनकारी मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एकत्र हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित गलत तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने के खिलाफ कड़ा विरोध जताया, तथा चुनाव आयोग की नियुक्तियों में पूर्ण पारदर्शिता की मांग की।
प्रशासन ने इस अनधिकृत भीड़ को रोकने के लिए त्वरित कदम उठाए। दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत सख्त निषेधाज्ञा लागू की, और भारी पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) तथा ड्रोन निगरानी तैनात कर दी। राजधानी के लगभग 12 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद कर दिए जाने से लोगों की आवाजाही भी बुरी तरह प्रभावित हुई।
विपक्षी नेताओं ने इस सामूहिक हिरासत की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया है





