BIG NEWS
- रक्षा तैयारियों को बढ़ावा देने के लिए 2 अरब डॉलर के रिकॉर्ड ड्रोन खरीद की योजना
- बिहार के मुजफ्फरपुर में एक प्राइवेट अस्पताल के ICU में आग लगने से तीन लोगों की मौत
- गौरी स्प्रैट से शादी करेंगे 61 साल के आमिर खान, प्राइवेट सेरेमनी में शामिल हो सकते हैं सलमान और SRK
- बंगाल: TMC से निकाले गए बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी को LoP का दर्जा मिला, ममता से मुख्य सलाहकार बनने की अपील
- भारत ने चांदी के आयात पर पाबंदियां और सख्त कीं, पहले से मंज़ूरी की ज़रूरी
- पटना में 'खान सर' के कोचिंग इंस्टीट्यूट में तोड़फोड़, पत्थरबाज़ी
- US सेना ने ईरान के केशम द्वीप पर किया हमला तो तेहरान ने खाड़ी देशों को बनाया निशाना
- ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की जांच के बीच CBSE चेयरमैन व सेक्रेटरी का तबादला
- FEMA मामले में वेदांता ग्रुप के ठिकानों पर ED की तलाशी
- अगर मैं न होता तो तुम जेल में होते: लेबनान में तनाव बढ़ने पर ट्रंप ने नेतन्याहू को लताड़ा
झारखंड शराब घोटाला: एसीबी कोर्ट से निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को मिली जमानत
Public Lokpal
August 19, 2025
झारखंड शराब घोटाला: एसीबी कोर्ट से निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को मिली जमानत
रांची: झारखंड शराब घोटाले के सिलसिले में 20 मई से जेल में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (बीएनएसएस) की धारा 187(2) के तहत रांची स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) अदालत ने डिफ़ॉल्ट ज़मानत दे दी है।
अदालत ने इस शर्त पर ज़मानत दी कि उन्हें राज्य छोड़ने से पहले अदालत को सूचित करना होगा। उन्हें मुकदमे के दौरान अपना मोबाइल नंबर न बदलने की नसीहत भी दी गई है। उन्हें 25,000 रुपये के दो निजी मुचलके भी भरने का निर्देश दिया गया है।
विनय चौबे को डिफ़ॉल्ट ज़मानत इसलिए मिली क्योंकि एसीबी निर्धारित 90 दिनों की अवधि के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने में विफल रही। जाँच एजेंसी ने कहा कि अभियोजन की मंज़ूरी न मिलने के कारण देरी हुई।
एसीबी ने घोटाले के सिलसिले में पूछताछ के बाद 20 मई को चौबे को गिरफ्तार किया था। वह न्यायिक हिरासत में हैं और राज्य सरकार ने गंभीर आरोपों के चलते उन्हें निलंबित कर दिया है।
जाँचकर्ताओं के अनुसार, चौबे ने कथित तौर पर छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट के साथ मिलकर झारखंड की नई शराब नीति तैयार की, जिसे 31 मार्च, 2022 को लागू किया गया, जिससे राज्य को वित्तीय नुकसान हुआ। इस मामले में कम से कम 10 आरोपी वर्तमान में जेल में हैं, और आरोपपत्र दाखिल न होने के कारण वे भी डिफ़ॉल्ट जमानत के पात्र हो सकते हैं।










