BIG NEWS
- जम्मू-कश्मीर का बड़ा फैसला: घाटी के स्कूलों में किताबों की व्यापक स्क्रीनिंग के आदेश
- मंगलाहाट के फेरीवालों को कलकत्ता हाई कोर्ट से अंतरिम राहत नहीं
- मौसम विभाग की चेतावनी: मानसून कमजोर पड़ने से खरीफ फसलों की बुआई पर बड़ा असर
- अमेरिका ने ईरान में 90 ठिकानों पर किया हमला; जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों पर दागीं मिसाइलें
- मानसून का कहर: पुणे, दिल्ली और मुंबई में इमारतें ढहीं, भारी तबाही
- तिहाड़ और रोहिणी जेलों का बोझ कम करने की तैयारी, 48 शहरी गांवों में जमीन खोजेगी दिल्ली सरकार
- महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में भूकंप के झटके, हिंगोली, नांदेड़ और परभणी में दहशत
- मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तृणमूल कांग्रेस के 440 करोड़ रुपये के बैंक डिपॉजिट फ्रीज़, ईडी ने दिया आदेश
- मोस्ट वांटेड गैंगस्टर गोल्डी बराड़ पर FBI ने रखा $50,000 का इनाम
- अमेरिका ने निज्जर की हत्या के मामले में लॉरेंस बिश्नोई पर तय किए आरोप
जम्मू-कश्मीर का बड़ा फैसला: घाटी के स्कूलों में किताबों की व्यापक स्क्रीनिंग के आदेश
Public Lokpal
July 09, 2026
जम्मू-कश्मीर का बड़ा फैसला: घाटी के स्कूलों में किताबों की व्यापक स्क्रीनिंग के आदेश
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा निदेशालय (DSEK) ने कश्मीर संभाग के सभी सरकारी स्कूलों, निजी संस्थानों और कोचिंग सेंटरों में मौजूद हर किताब की तत्काल और सघन जांच (स्क्रीनिंग) के आदेश दिए हैं। संस्था प्रमुखों को अपनी लाइब्रेरी, कक्षाओं और कार्यालयों का ऑडिट कर ऐसी किसी भी सामग्री को हटाने का निर्देश दिया गया है जो "आपत्तिजनक या अनुपयुक्त" हो, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हो, या राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाती हो।
आदेश के मुताबिक, सभी पठन सामग्री राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के दिशानिर्देशों के अनुरूप होनी चाहिए। सभी संस्थानों को 13 जुलाई 2026 तक एक हस्ताक्षरित अनुपालन प्रमाण पत्र सौंपना होगा, जिसमें यह पुष्टि करनी होगी कि उनके परिसर में कोई भी विवादित किताब नहीं बची है।
यह कदम हाल ही में स्थानीय इतिहास की दो किताबों को हटाए जाने और अलगाववादी नेताओं के कथित महिमामंडन के मामले में एक प्रकाशक पर यूएपीए (UAPA) के तहत दर्ज हुई एफआईआर के बाद उठाया गया है।
जहां एक तरफ प्रशासन इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और शैक्षणिक शुचिता के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय राजनीतिक दल इसे सेंसरशिप और इतिहास को दबाने का प्रयास बताकर इसकी आलोचना कर रहे हैं।




