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मशहूर फोटो पत्रकार रघु राय का लंबी बीमारी के बाद 83 वर्ष की आयु में निधन
Public Lokpal
April 26, 2026
मशहूर फोटो पत्रकार रघु राय का लंबी बीमारी के बाद 83 वर्ष की आयु में निधन
नई दिल्ली: मशहूर फ़ोटो जर्नलिस्ट रघु राय का रविवार तड़के नई दिल्ली में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 83 साल के थे। उनका निधन एक निजी अस्पताल में हुआ; वे अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जिसने यह तय किया कि भारत को देश और दुनिया भर में किस नज़र से देखा जाए। रघु राय के परिवार में उनकी पत्नी गुरमीत, बेटे नितिन, और बेटियां लगन, अवनी और पुरवाई हैं।
उनके बेटे नितिन राय ने बताया कि उनके पिता पिछले दो सालों से कैंसर से जूझ रहे थे, जो बाद में उम्र से जुड़ी दूसरी दिक्कतों के साथ-साथ उनके दिमाग तक फैल गया था। उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के लोधी श्मशान घाट पर किया जाएगा।
कौन थे रघु राय?
1942 में (जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है) जन्मे रघु राय का फ़ोटोग्राफ़ी का सफ़र 1960 के दशक में शुरू हुआ था। इन दशकों के दौरान, उनके कैमरे ने भारत के इतिहास, लोगों और भावनाओं को कैद किया—फिर चाहे वे राजनीतिक नेता हों या सड़कों पर आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी।
रघु राय के काम को तब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली जब मशहूर फ़ोटोग्राफ़र हेनरी कार्टियर-ब्रेसॉन ने उन्हें खुद 'मैग्नम फ़ोटोज़' में शामिल होने के लिए नॉमिनेट किया—जो किसी भी भारतीय के लिए एक बहुत बड़ा सम्मान था। इसके बाद उन्होंने 18 से ज़्यादा किताबें प्रकाशित कीं और 'टाइम', 'लाइफ़' और 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' जैसे दुनिया भर के मशहूर प्रकाशनों में अपना योगदान दिया। उनके काम की प्रदर्शनियां दुनिया के कई बड़े शहरों में लगाई गईं।
पुरस्कार और यादगार काम
1972 में, रघु राय को बांग्लादेश युद्ध की कवरेज के लिए 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया था। बाद में उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिले, जिनमें भारत सरकार की ओर से दिया गया 'लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड' भी शामिल है।
भोपाल गैस त्रासदी पर उनकी कवरेज उनके सबसे दमदार कामों में से एक मानी जाती है, जिसने पीड़ितों की तकलीफ़ों की ओर पूरी दुनिया का ध्यान खींचा।
रघु राय का काम महज़ चीज़ों को रिकॉर्ड करने तक ही सीमित नहीं था। उनकी तस्वीरों में भावनाएं, गहराई और सच्चाई झलकती थी; वे अक्सर ऐसी कहानियों को बयां करती थीं जिन्हें शब्दों में कहना मुमकिन नहीं था। इंदिरा गांधी के पोर्ट्रेट से लेकर मदर टेरेसा के साथ बिताए पलों तक—उनकी फ़ोटोग्राफ़ी आधुनिक भारत का एक जीता-जागता दस्तावेज़ बन गई।




