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नाज़िया बीबी के संघर्ष की कहानी भारत के लिए स्वर्ण पदक, पर राज्य की ओर से खामोशी
Public Lokpal
September 26, 2026
नाज़िया बीबी के संघर्ष की कहानी भारत के लिए स्वर्ण पदक, पर राज्य की ओर से खामोशी
श्रीनगर: जम्मू के नगरोटा के बन गांव की रहने वाली 21 वर्षीय नाज़िया बीबी ने अंतरराष्ट्रीय खो-खो में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली जम्मू-कश्मीर की पहली खिलाड़ी बनकर इतिहास रच दिया। उन्होंने नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में खेले गए पहले खो-खो विश्व कप में खिताबी जीत हासिल करने वाली भारतीय महिला टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक घुमंतू गुर्जर-बकरवाल आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखने वाली नाज़िया का यह सफर बेहद कठिन रहा। उन्होंने महिलाओं के खेलकूद और उच्च शिक्षा को लेकर समाज की रूढ़िवादी सोच, भारी आर्थिक तंगी और बुनियादी खेल सुविधाओं के अभाव का डटकर सामना किया।
देश को वैश्विक स्तर पर गौरवान्वित करने के बावजूद, उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से अपेक्षित सम्मान और समर्थन नहीं मिला। जहां एक ओर देश के शीर्ष नेताओं ने इस जीत की सराहना की, वहीं नाज़िया और स्थानीय खेल प्रेमियों ने राज्य में खेल के बुनियादी ढांचे की खस्ताहाली पर सवाल उठाए। जम्मू में इंडोर स्टेडियमों और विशेष मैट जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। उनकी यह कहानी भारत के उन जमीनी स्तर के आदिवासी एथलीटों के अदम्य साहस को दर्शाती है, जिन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ व्यवस्था की उदासीनता से भी जूझना पड़ता है। खेल विशेषज्ञ क्षेत्रीय चैंपियनों के लिए मजबूत वित्तीय सहायता, उचित सम्मान और स्थिर करियर के अवसरों की लगातार मांग कर रहे हैं।





