BIG NEWS
- एशियाई खेल 2026: नवाज के 96 रन बेकार, भारत ने पाकिस्तान को हराकर फिर जीता क्रिकेट स्वर्ण
- तमिलनाडु जल संकट: बारिश की कमी से आधे से अधिक बांधों में 25% से कम पानी
- ओमान पायलट ने किया था फ्लाईदुबई के कॉकपिट पर हमला
- यूएन जलवायु प्रमुख ने भारत के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण का किया समर्थन
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आप नेता सौरभ भारद्वाज और संजीव झा हिरासत में
- त्योहारों से ठीक पहले ग्रामीण बाजारों पर मानसूनी संकट की मार
- एसबीआई ने सैलरी अकाउंट्स के लिए फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन घटाए, बल्क एफडी के नए नियम लागू
- शासन संबंधी चिंताओं के बीच एचडीएफसी बैंक के नए प्रमुख बने अनूप बाग्ची
- लोकतंत्र सेनानियों के लिए 51,000 रुपये पेंशन: अखिलेश ने 'भाजपा सरकार की इमरजेंसी' पर साधा निशाना
- भारत ने रूसी सेना में शामिल होने वाले नागरिकों के लिए जारी की कड़ी एडवाइजरी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद उत्तराखंड समान नागरिक संहिता अब बना कानून
Public Lokpal
March 13, 2024
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद उत्तराखंड समान नागरिक संहिता अब बना कानून
देहरादून : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को उत्तराखंड के समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पर हस्ताक्षर कर उसे कानून बना दिया। यह एक महीने से अधिक समय के बाद आया जब विधेयक 7 फरवरी को उत्तराखंड विधानसभा द्वारा पारित किया गया था। यह विधेयक सभी नागरिकों के लिए एक समान विवाह, तलाक, भूमि, संपत्ति और विरासत कानून स्थापित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रस्तुत किया गया था। चाहे उनका धर्म कोई भी हो।
कानून की मुख्य बातें:
समान नागरिक संहिता में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और संबंधित मामलों से संबंधित कानून शामिल हैं। समान नागरिक संहिता कानून लिव-इन रिलेशनशिप को कानून के तहत पंजीकृत करना अनिवार्य बनाता है।
यह कानून बाल विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है और तलाक के लिए एक समान प्रक्रिया शुरू करता है। यह संहिता सभी धर्मों की महिलाओं को उनकी पैतृक संपत्ति में समान अधिकार प्रदान करती है। यूसीसी कानून के अनुसार, सभी समुदायों में शादी की उम्र महिलाओं के लिए 18 वर्ष और पुरुषों के लिए 21 वर्ष होगी। सभी धर्मों में विवाह पंजीकरण अनिवार्य है और बिना पंजीकरण के विवाह अमान्य होंगे। शादी के एक साल बाद तलाक की कोई याचिका दायर करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
विवाह के लिए समारोहों पर प्रकाश डालते हुए, यूसीसी कानून में कहा गया है कि धार्मिक मान्यताओं, प्रथाओं, प्रथागत संस्कारों और समारोहों के अनुसार एक पुरुष और एक महिला के बीच विवाह संपन्न या अनुबंधित किया जा सकता है, जिसमें "सप्तपद", "आशीर्वाद", शामिल है, लेकिन यह इन्हीं तक सीमित नहीं है। आनंद विवाह अधिनियम 1909 के तहत निकाह", "पवित्र मिलन" और "आनंद कारज", साथ ही विशेष विवाह अधिनियम, 1954 और आर्य विवाह मान्यकरण अधिनियम, 1937 के तहत, लेकिन यह इन्हीं तक सीमित नहीं है।
9 सदस्यीय कमेटी ने यूसीसी ड्राफ्ट तैयार किया
यूसीसी कानून के प्रावधानों के आसान कार्यान्वयन के लिए प्रक्रियाओं, सक्षम स्तर के अधिकारियों के पदनाम से संबंधित नियमों का मसौदा तैयार करने के लिए एक पूर्व मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। समान नागरिक संहिता कानून लागू करने वाला उत्तराखंड भारत का पहला राज्य है जिसमें लिव-इन रिलेशनशिप को भी शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री धामी ने समान नागरिक संहिता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह विवाह, भरण-पोषण, विरासत और तलाक जैसे मामलों में बिना किसी पूर्वाग्रह के सभी व्यक्तियों के लिए समानता सुनिश्चित करेगा।




.jpeg)
.jpeg)

.jpeg)



