पश्चिमी घाट भूस्खलन: त्वरित चेतावनी प्रणालियों और पारिस्थितिक संतुलन की तत्काल आवश्यकता

Public Lokpal
July 11, 2026

पश्चिमी घाट भूस्खलन: त्वरित चेतावनी प्रणालियों और पारिस्थितिक संतुलन की तत्काल आवश्यकता


पश्चिमी घाट में बढ़ते विनाशकारी भूस्खलन—वायनाड के बुनियादी ढांचा गलियारों से लेकर संवेदनशील पहाड़ी बस्तियों तक—एक मजबूत 'लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टम' (LEWS) की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

वर्तमान में, टिल्ट मीटर जैसे सेंसर आधारित नेटवर्क सटीक और समय पर चेतावनी तो देते हैं, लेकिन वे अत्यधिक स्थानीयकृत हैं और बिना सेंसर वाले ढलानों की निगरानी नहीं कर पाते।

दूसरी ओर, क्षेत्रीय वर्षा-दहलीज (Rainfall-threshold) मॉडल बड़े क्षेत्र को कवर करते हैं, लेकिन अरब सागर के गर्म होने से होने वाली अचानक तीव्र बारिश (क्लाउडबर्स्ट) का सटीक अनुमान लगाने में विफल रहते हैं।

इसका समाधान एक हाइब्रिड मॉडल है: एआई-संचालित उपग्रह निगरानी को जमीनी स्तर पर कम लागत वाले सामुदायिक रेन-गेज नेटवर्क के साथ जोड़ा जाए। हालांकि, केवल तकनीक काफी नहीं है।

जब तक सरकारें इस डेटा के साथ पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESZ) में भारी इंजीनियरिंग और ब्लास्टिंग पर सख्त रोक नहीं लगातीं, तब तक आपदाओं को रोकना असंभव है।