रेलवे कोच की उपलब्धियां और पुरानी स्वच्छता स्थिति का अंतर्विरोध

Public Lokpal
September 08, 2026

रेलवे कोच की उपलब्धियां और पुरानी स्वच्छता स्थिति का अंतर्विरोध


वड़ोदरा : रेलवे नेटवर्क के आधुनिकीकरण और जमीनी स्वच्छता के बीच एक गहरा विरोधाभास साफ दिखाई देता है। एक तरफ वंदे भारत, तेजस, और अमृत भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेनें और आधुनिक एलएचबी (LHB) कोच देश की तकनीकी और विनिर्माण क्षमता के बड़े मील के पत्थर साबित हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ यात्रियों द्वारा झेली जाने वाली स्वच्छता की पुरानी समस्याएं आज भी बनी हुई हैं।

पटरियों पर गंदगी रोकने के लिए बायो-टॉयलेट (Bio-Toilets) का बड़े पैमाने पर लगना एक ऐतिहासिक तकनीकी कदम था। लेकिन इसके बावजूद, ट्रेन के सफर के दौरान गंध, पानी की कमी, और चोक होने जैसी समस्याएं इस उपलब्धि के दावों को कमजोर कर देती हैं। इसी तरह, ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विसेज (OBHS) और कोच मित्र जैसी डिजिटल पहलें स्वच्छता को पारदर्शी बनाने के लिए शुरू की गईं, परंतु लंबी दूरी की यात्राओं में जमीनी हकीकत इन कागजी दावों से अक्सर मेल नहीं खाती।

यह अंतर स्पष्ट करता है कि केवल अत्याधुनिक कोचों का निर्माण और नए रिकॉर्ड बनाना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए डिपो पर मजबूत जल बुनियादी ढांचे, निरंतर रखरखाव, और डिब्बों की नियमित सफाई व्यवस्था को उतनी ही प्राथमिकता देनी होगी। जब तक तकनीकी मील के पत्थर और जमीनी स्वच्छता के स्तर के बीच का यह फासला खत्म नहीं होता, तब तक यात्रियों का पूर्ण संतोष हासिल करना कठिन रहेगा।