गुजरात: अडानी प्रोजेक्ट के खिलाफ किसानों के विरोध के आगे झुकी सरकार, मुआवजे की नीति बदली

Public Lokpal
July 06, 2026
गुजरात: अडानी प्रोजेक्ट के खिलाफ किसानों के विरोध के आगे झुकी सरकार, मुआवजे की नीति बदली
गांधीनगर: गुजरात के मोरबी में अडानी और अन्य निजी ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स की बिजली लाइनों के खिलाफ किसानों के भारी विरोध के आगे आखिरकार भूपेंद्र पटेल सरकार झुक गई है। सरकार ने किसानों के लिए मुआवजे की नीति में बड़ा बदलाव किया है।
यह आंदोलन अडानी ग्रुप, रिलायंस और पावरग्रिड कॉर्पोरेशन जैसी बड़ी कंपनियों के ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स (विशेषकर कच्छ के खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट) के तहत खेतों में बिछाई जा रही हाई-वोल्टेज बिजली लाइनों और बड़े टावरों के विरोध में चल रहा था। किसानों का कहना था कि इन टावरों के कारण उनकी उपजाऊ जमीन खेती के लायक नहीं बचती और जमीन के दाम गिर जाते हैं। मोरबी में 11 किसान पिछले 16 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे।
सरकार द्वारा किए गए नीतिगत बदलाव :
जंत्री दर के बदले बाजार मूल्य (Market Rate): अब तक बिजली के खंभे और लाइनें बिछाने के लिए सरकारी 'जंत्री दर' (सर्किल रेट) का 200% मुआवजा मिलता था, जो बाजार कीमत से बहुत कम होता था। नई नीति के तहत अब सीधे बाजार मूल्य का दोगुना (200%) मुआवजा दिया जाएगा।
टावर के नीचे की जमीन का दायरा बढ़ाया: पहले केवल टावर के वास्तविक बेस (नीचे की जमीन) का ही मुआवजा मिलता था। अब टावर के चारों तरफ 1-1 मीटर अतिरिक्त जमीन को जोड़कर मुआवजा गिना जाएगा। उदाहरण के लिए, 765 kV की ट्रांसमिशन लाइन के लिए मुआवजा क्षेत्र 625 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 729 वर्ग मीटर कर दिया गया है।
100% एडवांस भुगतान: पुराना नियम था कि मुआवजा तीन किश्तों में (40% फाउंडेशन, 40% टावर खड़े होने पर और 20% तार खींचने के बाद) मिलता था। सरकार ने इसे पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब काम शुरू होने से पहले 100% मुआवजा एक साथ एडवांस में दिया जाएगा।
मार्केट रेट कमेटी (MRC) का गठन: जमीन की सही और पारदर्शी कीमत तय करने के लिए हर जिले में एक कमेटी बनेगी। इसमें जिला कलेक्टर, प्रभावित किसान, किसानों द्वारा चुना गया एक अधिकृत मूल्यांकनकर्ता (Valuer) और बिजली कंपनी के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
राइट ऑफ वे (RoW) का नया गणित: बिजली की लाइनों के नीचे आने वाले कॉरिडोर (राइट ऑफ वे) के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार मूल्य का 30%, नगर पालिका क्षेत्रों में 45% और नगर निगम सीमा में 60% मुआवजा मिलेगा।
वर्तमान स्थिति और गतिरोध:
यह नई नीति उन चालू प्रोजेक्ट्स पर भी लागू होगी जहां काम अभी चल रहा है। हालांकि, 'किसान कांग्रेस' और 'किसान संघर्ष समिति' जैसे संगठनों ने इस फैसले का स्वागत तो किया है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है ।

