BIG NEWS
- श्रीलंका के तट पर ईरानी युद्धपोत डूबा, 32 लोगों को बचाया गया और 100 से ज़्यादा लोगों के लापता होने की आशंका
- सिर्फ़ तेल और गैस ही नहीं, ईरान पर युद्ध से दवाईयां और सेमीकंडक्टर तक की आपूर्ति हो रही प्रभावित
- US और इज़राइली सेनाओं ने ईरान, लेबनान में सैकड़ों ठिकानों पर किया हमला
- अयातुल्ला खामेनेई के बेटे चुने गए ईरान के नए सुप्रीम लीडर
- झारखंड में SIR के लिए अप्रैल की डेडलाइन तय, 100 दिनों में पूरी होगी यह प्रक्रिया
- चार धाम प्रोजेक्ट: उत्तरकाशी में सड़क चौड़ीकरण की मंज़ूरी हो रद्द बीजेपी नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री ने की अपील
- रियाद में US एम्बेसी पर 2 ईरानी ड्रोन से हमला, सामने आया ट्रंप का पलटवार
- दुनिया का सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, दुबई बंद: इज़राइल-US-ईरान लड़ाई में क्या है UAE की स्थिति
- उड्डयन मंत्रालय ने एयर टिकट रिफंड नियमों में किया बदलाव, 48 घंटे में बुकिंग रद्द करने पर मिलेगी राहत
- PM मोदी 100 मिलियन फॉलोअर्स के साथ इंस्टाग्राम पर सबसे ज़्यादा फॉलो किए जाने वाले दुनिया के लीडर
गैर-हिंदुओं के लिए हर की पौड़ी में प्रवेश निषेध: क्या कहता है 110 साल पुराना नियम?
Public Lokpal
January 17, 2026
गैर-हिंदुओं के लिए हर की पौड़ी में प्रवेश निषेध: क्या कहता है 110 साल पुराना नियम?
देहरादून: धार्मिक शहर हरिद्वार में पवित्र हर की पौड़ी घाटों के आसपास गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने वाले बेहद विवादित पोस्टर प्रमुखता से लगाए गए हैं।
इन साइन बोर्ड पर साफ तौर पर लिखा है: "गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।" ये नोटिस श्री गंगा सभा ने लगाए हैं, जो इस पवित्र स्थल के मामलों का प्रबंधन करने वाली संस्था है।
पोस्टर में इस प्रतिबंध के कानूनी आधार के तौर पर हरिद्वार के 1916 के नगर पालिका अधिनियम/नियमों का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि इस क्षेत्र में गैर-हिंदुओं का प्रवेश स्पष्ट रूप से वर्जित है।
हर की पौड़ी हरिद्वार का आध्यात्मिक केंद्र है, जहां गंगा में पवित्र स्नान के लिए रोजाना हजारों श्रद्धालु आते हैं।
पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित श्री गंगा सभा इस स्थल के संचालन का प्रबंधन करती है।
श्री गंगा सभा के वर्तमान अध्यक्ष नितिन गौतम ने इस प्रवेश प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने की पुरजोर मांग की है। उनकी इस मांग का कई संतों और हिंदू संगठनों ने समर्थन किया है, उनका तर्क है कि धार्मिक पवित्रता बनाए रखने के लिए पहुंच को प्रतिबंधित करना महत्वपूर्ण है।
गौतम ने जोर देकर कहा, "1916 के नगर पालिका नियम में साफ तौर पर कहा गया है कि कोई भी गैर-हिंदू हर की पौड़ी क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकता है। हमने प्रशासन से इन मौजूदा प्रावधानों पर कार्रवाई करने के लिए बार-बार अनुरोध किया, लेकिन कोई ठोस जवाब न मिलने पर, हमें ये साइन बोर्ड लगाने पड़े।"
सूत्रों के अनुसार, 1916 के नगर पालिका नियम पंडित मदन मोहन मालवीय और ब्रिटिश सरकार के बीच एक समझौते से बने थे, जिन्हें हरिद्वार की धार्मिक पवित्रता और गरिमा को बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया गया था।
इन ऐतिहासिक नियमों के अनुसार, गैर-हिंदुओं को हर की पौड़ी जैसे प्रमुख घाटों में प्रवेश करने से प्रतिबंधत किया गया था और उन्हें स्थायी निवास स्थापित करने से भी रोका गया था, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि शहर सनातन परंपराओं के अनुसार सुरक्षित रहे।
खास बात यह है कि ये नियम कथित तौर पर वर्तमान हरिद्वार नगर निगम के नियमों में भी शामिल हैं। साधुओं और स्थानीय पुजारियों ने लंबे समय से न केवल प्रवेश के लिए बल्कि क्षेत्र में गैर-हिंदुओं द्वारा व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए भी इन नियमों को लागू करने की मांग की है।



