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MUDA घोटाला मामले में सिद्धारमैया को बड़ी राहत: लोकायुक्त पुलिस ने दी क्लीन चिट
Public Lokpal
February 19, 2025 | Updated: February 19, 2025
MUDA घोटाला मामले में सिद्धारमैया को बड़ी राहत: लोकायुक्त पुलिस ने दी क्लीन चिट
नई दिल्ली: MUDA साइट आवंटन मामले की जांच कर रही लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार को कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनकी पत्नी पार्वती के खिलाफ आरोप सबूतों के अभाव में साबित नहीं हो सके।
जांच अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने हाईकोर्ट को अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है।
लोकायुक्त पुलिस ने कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा को लिखे पत्र में कहा, "चूंकि मामले में आरोपी-1 से लेकर आरोपी-4 के खिलाफ उपरोक्त आरोप सबूतों के अभाव में साबित नहीं हो पाए हैं, इसलिए अंतिम रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी जा रही है।"
कृष्णा MUDA मामले में शिकायतकर्ता हैं।
सिद्धारमैया और उनकी पत्नी के अलावा उनके साले मल्लिकार्जुन स्वामी और जमीन के मालिक देवराजू भी आरोपी हैं।
लोकायुक्त पुलिस ने कहा कि मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) द्वारा 2016 से 2024 तक 50:50 के अनुपात में प्रतिपूरक भूखंड प्रदान करने के आरोपों की आगे की जांच की जाएगी। धारा 173 (8) सीआरपीसी के तहत उच्च न्यायालय को एक अतिरिक्त अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
MUDA साइट आवंटन मामले में, यह आरोप लगाया गया है कि सिद्धारमैया की पत्नी को मैसूर के एक अपमार्केट क्षेत्र में प्रतिपूरक भूखंड आवंटित किए गए थे, जिसकी संपत्ति का मूल्य उनकी भूमि के स्थान की तुलना में अधिक था जिसे MUDA द्वारा "अधिग्रहित" किया गया था।
MUDA ने पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ भूमि के बदले में 50:50 अनुपात योजना के तहत भूखंड आवंटित किए थे। यहाँ उन्होंने एक आवासीय लेआउट विकसित किया था।
विवादास्पद योजना के तहत, MUDA ने आवासीय लेआउट बनाने के लिए उनसे अधिग्रहित अविकसित भूमि के बदले में भूमि खोने वालों को 50 प्रतिशत विकसित भूमि आवंटित की।
आरोप है कि मैसूरु तालुक के कसाबा होबली के कसारे गांव के सर्वे नंबर 464 में स्थित 3.16 एकड़ जमीन पर पार्वती का कोई कानूनी हक नहीं था। लोकायुक्त और ईडी दोनों ही मामले की एक साथ जांच कर रहे हैं।




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