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भारत के आर्थिक सुधार के प्रणेता पीएम स्व. पीवी नरसिम्हा राव की जन्मशती पर विशेष

Public Lokpal
June 28, 2021

भारत के आर्थिक सुधार के प्रणेता पीएम स्व. पीवी नरसिम्हा राव की जन्मशती पर विशेष


आज (28 जून) भारत के नौवें प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की जन्मशती है। 1921 में राव का जन्म तत्कालीन निज़ाम शासित हैदराबाद के एक गाँव में हुआ था। 1991 से 1996 तक प्रधान मंत्री रहने के अलावा, उन्होंने अपने करियर के दौरान अधिकांश महत्वपूर्ण राजनीतिक विभागों विदेश मंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और इसी तरह पदों को संभाला।

वह जब प्रधान मंत्री बने जब भारत एक राजनीतिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहा था। विश्व स्तर पर, भारत के एक दीर्घकालिक सहयोगी सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक (यूएसएसआर) के संघ के टूटने के कारण दुनिया बिखर गई थी। इन सभी दबावों के बावजूद, वह न केवल अपने पांच साल के कार्यकाल को पूरा करने में सफल रहे, बल्कि आज की भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव भी रखी। फिर भी उन्हें अक्सर इसका श्रेय नहीं दिया जाता है, और उनकी छवि और दशकों की कड़ी मेहनत उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण खराब हो जाती है।

कैसे दिल्ली छोड़कर वापस वारंगल लौट रहे राव के हाथ आई प्रधानमंत्री की कुर्सी 

ज्योतिष पर पक्का भरोसा रखने वाले राव को अपनी 'जन्मपत्री' पर पूरा विश्वास था जिसमे उनके लिए कुछ बड़ा काम लिखा था। उनके विश्वास में बड़ी सच्चाई थी।

1991 में, उन्होंने लगभग बैग पैक कर ही लिया था और आंध्र में अपने जन्मस्थान वारंगल में जा रहे थे, तभी एक तकनीशियन उनके एक भारी कंप्यूटर सिस्टम को पैक करने में उनकी सहायता करने के लिए आया। यह तारीख थी 21 मई 1991, जब श्रीपेरुम्बदूर में राजीव गांधी की हत्या की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया और राजनीतिक क्षेत्र में एक बहुत बड़ा शून्य पैदा कर दिया।

राजीव गांधी की हत्या के बाद, कांग्रेस में चल रही गुटबाजी के चलते वह एक तरह से कम मान्य नेता थे। उस समय उनके प्रतिद्वंद्वियों, एन डी तिवारी, अर्जुन सिंह और शरद पवार एकदूसरे की राह में बड़े रोड़े अटका रहे थे। अंत में, प्रणब मुखर्जी, जो उत्तराधिकार की दौड़ में नहीं थे, ने बैठक की अध्यक्षता करने के लिए राव के नाम का प्रस्ताव रखा। राव अविवादित थे और सभी समूहों और गुटों द्वारा आसानी से स्वीकार लिए गए। साथ ही यहाँ तत्कालीन राष्ट्रपति आर वेंकटरमन ने राव का तगड़ा समर्थन किया जिन्होंने बिना बहुमत मांगे सरकार बनाने के लिए सबसे बड़े राजनीतिक गठन के नेता को आमंत्रित करने का एक नया सिद्धांत अपनाया। इसे सुनिश्चित करने में केरल के के करुणाकरण ने अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा, पर्याप्त संख्या में कांग्रेस सांसद दक्षिण भारत से चुने गए जो भारत के पहले दक्षिण भारतीय पीएम के पक्ष में थे।

इस तरह बैग पैक कर अपने जन्मस्थान वापस लौट रहे पीवी नरसिम्हा भारत के नौंवे एक्सीडेंटली प्रधानमंत्री बन गए।